विष के दांत (कहानी)
Question 1: शीर्षक की सार्थकता
कहानी का शीर्षक कथानक, पात्रों तथा उनकी मानसिकता के साथ पूर्णतः न्याय करता है। यह शीर्षक समाज में हो रहे लिंग भेद, बच्चों के प्रति अभिभावकों के दृष्टिकोण, तथा खोखा जैसे पात्र की विशिष्टता को रेखांकित करता है। शीर्षक पाठक का ध्यान कहानी के मूल भाव की ओर आकर्षित करता है, इसलिए वह पूरी तरह सार्थक है।Question 2: सेन साहब के परिवार में लिंग आधारित भेद-भाव
सेन साहब के परिवार में बालकों (खोखा) और बालिकाओं के बीच पालना-पोषण, व्यवहार और अपेक्षाओं में भेद स्पष्ट था। लड़कों को स्वतंत्रता, प्यार-दुलार, और सभी तरह की छूट थी, जबकि लड़कियों को सीमाएँ, अनुशासन व कठोरता दी जाती थी। लड़कियों के जीवन से सुख व स्वतंत्रता दूर रखी जाती थी जबकि खोखा को विशेष सुविधाएँ प्राप्त थी।
Question 3: खोखा किन मामलों में अपवाद था?
खोखा सेन दंपती का इकलौता बेटा था -- परिवार के सभी लोगों से अधिक दुलार, छूट और महत्व उसे दिया जाता था। उसके लिए परिवार के नियम बदल जाते थे, उसे कभी डांटा-फटकारा नहीं जाता था। लड़कियाँ जहाँ अनुशासन में रहती थीं, वहीं खोखा को हर गलती माफ़ थी।
Question 4: खोखा में संभावनाएँ और तयशुदा शिध
सेन दंपती खोखा को परिवार का भविष्य मानते थे। वे उसमें बड़े अधिकारी, डॉक्टर या इंजीनियर बनने की संभावनाएं देखते थे। उसके लिए अति-मूल्यवान शिक्षा, अच्छी सुविधाएँ, विभिन्न प्रतियोगिताओं में भागीदारी सुनिश्चित की थी। वे हर प्रकार का त्याग कर उसे आगे बढ़ाना चाहते थे।
Question 5: सप्रसंग व्याख्या
(क) "लड़कियाँ क्या हैं, कठपुतलियाँ हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है।"
यह कथन समाज में व्याप्त लिंग भेद और लड़कियों की स्वतंत्रता सीमित करने की प्रवृत्ति, तथा अभिभावकों की सोच को उजागर करता है। लड़कियों को सवाल करने की, अपनी मर्जी से जीने की अनुमति नहीं दी जाती, उन्हें कठपुतली की तरह परंपराओं में बांध दिया जाता है।
(ख) "खोखा के दुर्ललित स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने सिद्धांतों को भी बदल लिया था।"
इसका आशय है कि खोखा की जिद, शरारतें और गलतियों के बावजूद माता-पिता उसके प्रति अपने सभी नियम-सीमाएँ बदल लेते थे। उनके सिद्धांत सिर्फ बेटियों तक सीमित रह जाते थे, बेटा होने के कारण खोखा हर बार छूट पा जाता था।
(ग) "ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुंडे, चोर और डाकू बनते हैं।"
यह कथन अनुशासनहीनता, अत्यधिक दुलार, और गलत व्यवहार को बिना दंड दिए जाने के दुष्परिणाम की ओर संकेत करता है -- ऐसे बच्चों का भविष्य खराब हो सकता है।
(घ) "हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया।"
इसका तात्पर्य है कि कोई योग्य या उत्कृष्ट व्यक्ति यदि अनुचित संगति में पड़ जाता है, तो उसकी अच्छाइयाँ भी दब जाती हैं। यहाँ कथानक के संदर्भ में खोखा की संगति और चरित्रगत गिरावट पर इशारा है।
Question 6: सेन साहब, मित्रों की बातचीत और पत्रकार मित्र की सलाह
सेन साहब और मित्रों के बीच बच्चों के पालन-पोषण, अनुशासन, और संवादों को लेकर बहस होती है। पत्रकार मित्र ने उन्हें सलाह दी कि बच्चों में भेद-भाव न करें और बेटियों को भी वे सब अवसर व अधिकार दें, जो वे बेटे को देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास उचित मार्गदर्शन से ही संभव है।
Question 7: मदन और ड्राइवर विवाद, काशू-मदन झगड़ा, लेखक का उद्देश्य
मदन और ड्राइवर के बीच विवाद संपत्ति, हैसियत एवं अहंकार का परिचायक है। काशू और मदन का झगड़ा मूलतः ईर्ष्या, पक्षपात और उचित-अनुचित की समझ के अभाव से उत्पन्न होता है। लेखक इस प्रसंग के द्वारा सामाजिक विषमता, लिंग भेद तथा बच्चों के मनोविज्ञान को उजागर करना चाहता है।
Question 8: 'महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत ...'
(यह प्रश्न अधूरा है, अतः आगे की पंक्ति न होने से उत्तर स्पष्ट रूप से नहीं दिया जा सकता। पूछे गए भाग का संकेत यह है कि सामाजिक या आर्थिक संघर्ष में प्रायः संपन्न वर्ग की जीत होती है, परंतु कभी-कभी परिस्थितियाँ बदलती भी हैं या अन्य भाव व्यक्त किए जाते हैं।)