सोमवार, 16 अगस्त 2021

Syllabus (व्याकरण )

 

पर्यायवाची शब्द

(तीन-तीन स्वयं लिखे )


फूल = कुसुम , सुमन ,पुष्प

आकाश

पहाड़

नदी

गणेश                            

 सूर्य                                           

रात                                 

चाँद

घोड़ा

धरती      

आग

गंगा

राक्षस

शिव

 अनेक शब्दों के लिए एक शब्द –

·         जो क्षमा न किया जा सके अक्षम्य

·         जहाँ पहुँचा न जा सके अगम्य

·         जिसे सबसे पहले गिनना उचित हो अग्रगण्य

·         जिसका जन्म पहले हुआ हो अग्रज

·         जिसका जन्म बाद/पीछे हुआ हो अनुज

·         जिसकी उपमा न हो अनुपम

·         जिसका मूल्य न हो। अमूल्य

·         स्वयं अपने को मार डालना आत्महत्या

·         जो पढ़ालिखा न हो अनपढ़

 

  • जिसे टाला न जा सके अनिवार्य
  • जिसे काटा न जा सके अकाट्य
  • दोपहर के बाद का समय अपराह्न
  • जो जाँच या परीक्षा बहुत कठिन हो अग्निपरीक्षा
  • जिसे ईश्वर या वेद में विश्वास न हो नास्तिक
  • जिसे ईश्वर या वेद में विश्वास हो आस्तिक
  • जिसका नाथ (सहारा) न हो अनाथ/यतीम
  • जो थोड़ा जानता हो अल्पज्ञ
  • जिसे भय न हो निर्भय/अभय
  • जो कभी मरे नहीं अमर
  • जिसका शत्रु पैदा नहीं लिया अजातशत्रु
  • जो बहुत कुछ जानता हो बहुज्ञ
  • नीचे लिखा हुआ निम्नलिखित
  • ऊपर कहा गया। उपर्युक्त
  • बुरी बुद्धिवाला कुबुद्धि
  • चारों ओर चक्कर काटना परिक्रमा
  • पन्द्रह दिनों का समूह पक्ष
  • पढ़नेवाला पाठक
  • बाँचनेवाला वाचक
  • सुननेवाला श्रोता
  • बोलनेवाला वक्ता
  • लिखनेवाला लेखक
  • सोनेजैसे रंगवाला सुनहला
  • दस वर्षों का समूह दशक
  • सौ वर्षों का समूह शताब्दी
  • जो कठिनाई से मिले दुर्लभ
  • जिसका जवाब न हो लाजवाब

विलोम शब्द

शब्द 

विलोम

उत्तर
मान
बाहर
सूक्ष्म
विरोध
लोभ
स्वर्ग
समीप
साकार
तानाशाही
तरल
चतुर
रक्षक
स्तुति
सृष्टि
कायर
आदि
विपुल
राग
गुण
आदि
राग
संयोग
प्रत्यक्ष
उदार
आयात
भय
उष्ण
आर्य
उपकार
उद्यमी
आदान
कड़वा
पूरा
उत्थान
आग्रह
उन्नति
एकता
आशा
प्रातः
बंधन
अथ
अल्पायु
अनुराग
उतार
उग्र

दक्षिण
अपमान
भीतर
स्थूल
समर्थन
त्याग
नरक
दूर
निराकार
लोकतंत्र
ठोस
मूर्ख
भक्षक
निंदा
प्रलय
वीर
अनादि
न्यून
विराग
अवगुण
अनादि
विराग
वियोग
परोक्ष
अनुदार
निर्यात
निर्भय
शीत
अनार्य
अपकार
आलसी
प्रदान
मीठा
अधूरा
पतन
दुराग्रह
अवनति
अनेकता
निराशा।
सायं
मुक्ति
इति
दीर्घायु
विराग
चढ़ाव
शांत

 

 

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