शनिवार, 20 जनवरी 2024

कहानी का प्लॉट का प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न उत्तर

 

1. लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि कहानी लिखने योग्य प्रतिभा भी मुझमें नहीं है जबकि यह कहानी श्रेष्ठ कहानियों में एक है?
उत्तर- लेखक को अपनी बड़ाई खुद करने में विश्वास नहीं है क्योंकि लेखक को कला-मर्मज्ञ होना चाहिए और यहाँ लेखक कलाविद् भी अपने को नहीं मानते हैं।

2. लेखक ने भगजोगनी नाम ही क्यों रखा? ।
उत्तर-यह कहानी ग्रामीण परिवेश की कहानी है और उसमें लेखक को देहाती नाम अच्छा लग

3. मुंशीजी के बड़े भाई क्या थे? उत्तर-पलिस दारोगा।

4.दारोगाजी की तरक्की रुकने की क्या वजह थी?
उत्तर-दारोगा जी को एक घोड़ी थी। बहुत कम कीमत की मगर वह तुर्की घोड़े का कान काटती थी। उसको लेने के लिए बड़े-बड़े अंगरेज अफसर दाँत गड़ाए , हुए थे लेकिन दारोगा जी ने नहीं दिया। इसीलिए उनकी तरक्की रुक गई।


5.मुंशीजी अपने बड़े भाई से कैसे उऋण हुए?
उत्तर-एक गोरे अफसर के हाथ खासी रकम पर घोड़ी को बेचकर मुंशीजी अपने बड़े भाई से उऋण हुए।


6.‘थानेदार की कमाई और फूस का तापना दोनों बराबर हैं, लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर-
दारोगाजी के रहते जितनी मौज मस्ती थी उनके मरने के बाद सारी बातें गायब हो गयी थी। इसी संदर्भ में उपर्युक्त बातें कही गई हैं।


7. ‘मेरी लेखनी में इतना जोर नहीं’-लेखक ऐसा क्यों कहता है?
उत्तर-भगजोगनी के रूप-लावण्य का वर्णन करने में लेखक सारी उपमाओं के बाद भी अपने को असमर्थ पाता है तभी उसने कहा है कि मेरी लेखनी में इतना जोर नहीं है कि मैं इसका सटीक वर्णन कर सकूँ।

8. भगजोगनी का सौंदर्य क्यों नहीं खिल सका?
उत्तर-भगजोगनी, अनाथ बच्ची, गरीबी की चक्की में इतनी पिस गई थी कि उसे और बातों के अलावा दो जून खाना भी नसीब न था। फिर उसका सौंदर्य कैसे खिल सकता था।

प्रश्न 9.मुंशीजी गल-फाँसी लगाकर क्यों करना मरना चाहते हैं?
उत्तर-भगजोगनी की दशा देखकर अपनी गरीबी पर तरस खाकर बदहाली की जिंदगी जीने से मजबूर होकर गला-फाँसी लगा लेना चाहते हैं मुंशीजी।

प्रश्न 10.भगजोगनी का दूसरा वर्तमान नवयुवक पति उसका ही सौतेला बेटा है। यह घटना समाज की किस बुराई की ओर संकेत करती है और क्यों?
उत्तर-भगजोगनी की शादी वृद्ध से हुई थी जो उसके तरूणाई आते मर गया। आज वह युवती है, पूर्ण युवती। उसका सौंदर्य उसके वर्तमान पति का स्वर्गीय धन है। दूसरा पति उसका सौतेला बेटा। यही समाज की नियति है कि वह इस वातावरण में जीने को मजबूर है।

व्याख्याएँ

12. आशय स्पष्ट करें

(क) ‘जो जीभ एक दिन बटेरों का शोरबा सुड़कती थी, अब वह सराह-सराहकर मटर का सत्तू सरपोटने लगी। चुपड़ी चपातियाँ चबानेवाले दाँत अब चंद चबाकर दिन गुजरने लगे।’
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ शिवपूजन सहाय द्वारा लिखित ‘कहानी का प्लॉट’ शीर्षक से उद्धृत हैं। इसमें लेखक ने बड़े ही सहज ढंग से अमीरी से गरीबी में आने पर होनेवाले बदलाव का चित्रण किया है।

कहानी में लेखक को मुंशीजी ने जब रो-रोकर अपना दुखड़ा सुनाते हैं उसका बड़ा ही रोचक वर्णन लेखक ने किया है। मुंशीजी कहते हैं कि “क्या कहूँ बीते दिनों की, जब याद करता हूँ तो गश आ जाता है।” दारोगाजी के जीते-जी ऐश-मौज का बखान मुंशजी जी करते हैं और दारोगा जी मृत्यु के बाद आई गरीबी का इजहार करते हैं। उसका लेखक ने बड़े ही रोचक और सत्यता के साथ उजागर करता है। लोग अमीरी में कुछ भी नहीं सोचते। अनाप-शनाप, फिजूलखर्ची उनकी आदत बन जाती है। वही जब गरीबी आती है तो याद किस तरह सताती है इसका दिग्दर्शन लेखक ने ग्रामीण परिवेश में बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।

(ख) “सचमुच अमीरी की कब्र पर पनपी हुई गरीबी बड़ी ही जहरीली होती है।’
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ शिवपूजन सहाय द्वारा लिखित ‘कहानी का प्लॉट’ शीर्षक से उदधत है। लेखक ने समाज में होनेवाले उतार-चढाव का. फिर बीते दिनों की याद को वर्तमान में पश्चाताप का इतना सुंदर विवेचन किया है कि वह ही सत्य हो गया है।
मुंशीजी कहते हैं कि एक दिन वह था कि भाई साहब के पेशाब से चिराग जलता था, और एक दिन यह भी है कि मेरी हड्डियों मुफसिसी की आँच से मोमबत्तियों की तरह घुल घुलकर जल रही है। बड़ा अफसोस होता है लेकिन सच ही कहा गया है कि अमीरी के कब्र पर पनपी हुई गरीबी बड़ी ही जहरीली होती है। लेखक ने इतनी मार्मिकता से इसका वर्णन किया है जो अत्यंत ही संवेदनायुक्त है।

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