हिन्दी व्याकरण
भाषा बोली और व्याकरण
भाषा :- भाषा वह माध्यम है जिसके दवारा मनुष्य अपने मन के विचारों को या भावो को बोलकर या लिखकर व्यक्त करता है।
भाषा के प्रकार: भाषा तीन प्रकार की होती हैं।
1. लिखित भाषा 2. मैखिक भाषा 3. सांकेतिक भाषा
1. लिखित भाषाः जब मनुष्य 'अपने मन के भाव या विचारों को लिखकर प्रकट करता हैलो उसे लिखित भाषा कहते है। जैसे- सरेश पत्र लिख रहा है।
2. मैखिक भाषाः जब दो या दो से अधिक व्यक्ति बोलकर अपने मन की बात या भावो को एक दूसरे पर प्रकट करते हैं। उसे मैखिक भाषा कहते हैं।
3. सांकेतिक भाषाः जब व्यक्ति हाथों के हाव-भाव, चेहरे के भाव और शरीर की भाषा का प्रयोग किया जाता है। सांकेतिक भाषा कहते है।
4 मातृभाषाः मातृभाषा का शाब्दिक अर्थ है माता की भाषा या माँ की आषा वह' श्राषा जिसेक्त्वा अपनी मां से सीखता
5. राष्ट्रभाषा:-
किसी राष्ट्र के अधिकांश लोग जिस भाषा का प्रयोग करते है उसे राष्ट्र भाषा कहते है। अर्थात राष्ट्र में प्रयोग होने वाली भाषा राष्ट्रभाषा कहलाती है।
6 राजभाषा:
जिस भाषा का प्रयोग सरकारी कामकाज में किया जाता है। राजभाषा कहते है। भारत के संविधान में 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी को भारत की रजभाषा घोषित बिया गया। अनुच्छेद 343 में शिखा है भारत संघ की राजभाषा हिन्दी और नियि देवनागरी है।
बोली:
किसी खास क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा को बोली कहते हैं। अधोत किसी विशेष छक्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा को बोली कहा जाता है।
भाषा के अंग: आधा के तीन अंग निम्नलिखित है।
1. अक्षर
2.शब्द
3.वाक्य
अक्षर या वर्णः-
भाषा का छोटे से छोटे भाग जिसके टुकडे न किया जा सके उसे हम अक्षर या वर्ण कहते हैं। अर्थात वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते है जिसके टुकडे नहीं किये जा सकते हैं। जैसे अ आ इ ई आदि।
शब्दः
शब्द भाषा की छोटी इकाई है। या शब्द भाषा की सबसे छोटी अर्थपूर्ण इकाई है। दो या दो से अधिक अक्षर या वर्ण आपस में मिलकर शब्द बनाते है |ये शब्द किसी न किसी का अर्थ बताते है |जैसे फल,बिजली, जल आदि |
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